शरीर में थकान और कमजोरी महसूस होना एक आम बात लग सकती है, लेकिन अक्सर हम इसके पीछे के असली कारणों को नजरअंदाज कर देते हैं। विटामिन बी12 एक ऐसा आवश्यक पोषक तत्व है जिसकी कमी हमारे तंत्रिका तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
क्या सिर्फ शाकाहारियों को होती है विटामिन बी12 की कमी
आमतौर पर यह माना जाता है कि विटामिन बी12 केवल उन लोगों में कम होता है जो मांस या मछली का सेवन नहीं करते हैं। डॉ. आलोक कुमार सिंह, सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन, बताते हैं कि यह धारणा पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि मांसाहारी लोगों में भी इसकी कमी देखी जा सकती है।
विटामिन बी12 का अवशोषण केवल आहार पर निर्भर नहीं करता, बल्कि आपके पाचन तंत्र की कार्यक्षमता पर भी निर्भर होता है। यदि शरीर विटामिन को सही ढंग से सोख नहीं पा रहा है, तो मीट और अंडे खाने वाले लोगों में भी विटामिन बी12 का स्तर गिर सकता है।
भारत में शाकाहारी आबादी अधिक होने के कारण यहां इस विटामिन की कमी के मामले ज्यादा मिलते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मांसाहारी लोग सुरक्षित हैं। जीवनशैली और मेटाबॉलिक समस्याएं किसी भी व्यक्ति में विटामिन बी12 की कमी पैदा कर सकती हैं।
विटामिन B12 की कमी क्यों खतरनाक है?
विटामिन बी12, जिसे कोबालामिन भी कहा जाता है, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और डीएनए संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। इसकी कमी होने पर शरीर में खून की कमी या एनीमिया की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे अंगों तक ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है।
इसके अलावा, यह विटामिन हमारे नर्वस सिस्टम की सुरक्षात्मक परत (माइलिन) को बनाए रखने में मदद करता है। यदि समय रहते विटामिन बी12 की कमी को पूरा न किया जाए, तो तंत्रिकाओं को स्थायी नुकसान हो सकता है, जिससे हाथ-पैरों में झुनझुनी और संतुलन की कमी हो सकती है।
मिथक: दूध-दही खाने से विटामिन बी12 की कमी नहीं होगी
बहुत से लोग मानते हैं कि अगर वे पर्याप्त मात्रा में दूध और दही का सेवन कर रहे हैं, तो उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत नहीं है। हालांकि, डॉ. सिंह के अनुसार, डेयरी उत्पादों में विटामिन बी12 होता तो है, लेकिन इसकी मात्रा अक्सर दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी होती है।
एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना लगभग 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन बी12 की आवश्यकता होती है। केवल दूध और दही के भरोसे रहने से शरीर की इस जरूरत को पूरा करना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका अवशोषण स्तर कमजोर है।
विटामिन B12 की कमी के लक्षण तुरंत नहीं दिखते
विटामिन बी12 की कमी एक धीमी प्रक्रिया है और इसके लक्षण रातों-रात सामने नहीं आते हैं। हमारा लिवर इस विटामिन को सालों तक स्टोर करके रख सकता है, इसलिए कमी के संकेत मिलने में महीनों या कभी-कभी साल भी लग सकते हैं।
जब तक लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं, तब तक शरीर में इस विटामिन का स्तर काफी नीचे गिर चुका होता है। प्रारंभिक अवस्था में केवल हल्की सुस्ती या चिड़चिड़ापन महसूस होता है, जिसे लोग अक्सर काम के दबाव का परिणाम मान लेते हैं।
स्वस्थ महसूस करने पर भी विटामिन बी12 की कमी संभव
अगर आप बाहर से फिट दिख रहे हैं, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आपके शरीर के अंदर पोषक तत्वों का संतुलन सही है। विटामिन बी12 की कमी ‘साइलेंट’ हो सकती है, जो मानसिक थकान और एकाग्रता की कमी के रूप में शरीर को प्रभावित करती है।
डॉक्टरों का मानना है कि जो लोग लगातार दिमागी काम करते हैं और फिर भी थकान महसूस करते हैं, उन्हें अपनी जांच करानी चाहिए। बिना किसी बाहरी शारीरिक लक्षण के भी आपके नर्वस सिस्टम के अंदर विटामिन बी12 की भारी कमी हो सकती है।
नियमित रक्त परीक्षण ही एकमात्र तरीका है जिससे यह पता लगाया जा सके कि आपके शरीर में विटामिन बी12 का स्तर पर्याप्त है या नहीं। स्वस्थ दिखने वाले युवाओं में भी आजकल यह कमी बड़े पैमाने पर देखी जा रही है, जो चिंता का विषय है।
मिथक: विटामिन B12 की कमी सिर्फ बुजुर्गों में होती है
पुरानी धारणाओं के विपरीत, विटामिन बी12 की कमी अब केवल बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है। आधुनिक जीवनशैली, जंक फूड का अधिक सेवन और तनावपूर्ण दिनचर्या के कारण युवाओं में भी इसके स्तर में गिरावट देखी जा रही है।
आजकल छोटे बच्चे और किशोर भी पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो विटामिन के अवशोषण को प्रभावित करता है। इसलिए, उम्र चाहे जो भी हो, यदि आप ऊर्जा की कमी महसूस कर रहे हैं, तो विटामिन बी12 की जांच कराना एक बुद्धिमानी भरा कदम होगा।
विटामिन बी12 की कमी को नजरअंदाज करना आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महंगा पड़ सकता है। यदि आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करें और सही आहार व सप्लीमेंट के बारे में जानकारी लें।